~ हम :गत कथ्य ~

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हम उर्वर भी हम बंजर भी

हम शक्तिपुंज पर निर्भर भी

हम आयुष्मान मृतप्राय सदृश

हम सहें दृष्टिकोण के खंजर भी

हम केंद्र कभी और परिधि भी

हम पियूष कवच विष औषधि भी

हम मान कभी   बे माने भी

हम सारहीन सारार्थी,सतत ताने भी

हम नेपथ्य हुए बिन अंत ,अदृश्य

यवनिका गिरी नहीं पर खेल खतम

हम मूक बधिर पात्र भी दर्शक भी

हम कथ्य शून्य गाथा के

धुंधले अक्षर और निरर्थक भी

(सारार्थी-लाभ उठाने का इच्छुक )

~हाँ वो ही लम्हा~

जिंदगी से तरबतर
बूँद बूँद टपक रहा
सपनीली हवाओ से
सीलता रहा
वक़्त की आंच भी
ना सुखा सकी जिसे
हाँ वो ही लम्हा…
लम्हा लम्हा भीगता रहा .