~आत्मवत्ता कि नाव~

 

भाव लहरों कि टेक लगा कर
बहते देखूँ
मछलियों के भीतर के
खारे पानी को
 
वाताली  का अवलंब ले कर
बिखरते देखूँ
क्षणिक छुवन कि
धज्जियों को

आदतन स्वपोषित टेर पर
चुभते देखूँ
कीलित सम्बन्धों के बने कंटीले बाड़े से
मिली टीस को

या फिर

स्व से भाव का विच्छेद कर
जूझते देखूं
आत्मवत्ता कि नाव ले कर
छलनाओं की भंवर 

आत्मवंचना के अवधारित प्रवित्ति के दिये को
जलते देखूं
आत्मोदय कि श्रीहत होती लौ में
नियति मान

~~~~~~~~~

प्रश्न प्रश्न और प्रश्न  …
और फिर एकालाप 
  मिलता नहीं कोई विधाता सा
 

(वाताली -बवंडर/तूफ़ान , कीलित-कीला हुआ /बांध कर विवश कर निस्तेज करा हुआ ,आत्मवता-चेतना/आत्मनियंत्रण ,अवधारित-ज्ञात/सुनिश्चित )

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