झिलमिल तारा ढूंढूं

सूरज की एक कतरन धरती में बो दूँ

 भिगो भिगो कर जोतूं बोउं उगता देखूं
पालूं पोसूं एक आस को आँखों को भरकाऊँ
दिवास्वप्न की इस फसल पर धैर्य धरूँ
आलोकित फिर उस प्रकाश में झिलमिल तारा ढूंढूं

जानू हूँ स्वार्थ भरे खारे सिंचन से बंजर ही रह जाऊं
बेकाबू भावोर्मियों को भीतर कहीं छुपाऊँ

Image

वर्णमाला के झूलते अक्षर समूहों का मृदु स्पर्श

वर्णमाला के झूलते अक्षर समूहों का मृदु स्पर्श
सन्न करती एक जोड़ी अनुभूतियाँ का उत्कर्ष
स्मृति कलश संग साथ ले बूँदें  होती गतिमान
पुरवाई सी सिहराती  छुवन से झंकृत  अक्षमान

बस एक सूत

साँसों की यांत्रिक गति ,जीवन दूर बस एक सूत
गहरा कुहासा निस्तेज गोलक ,स्मृति दूर बस एक सूत
सम्पूर्ण भाव सम्पदा अरण्य वैभव ,कलरव दूर बस एक सूत
सम्मुख अंतस अस्तित्व विस्तार ,छुवन दूर बस एक सूत
परोक्ष  परीक्षा पावक ताप ,पावस दूर बस एक सूत
युगीन नीलकंठ रौद्र क्षुब्ध ,रुद्राक्ष दूर बस एक सूत
मुंदी  पलकें ह्रदय हिलोर ,नींद दूर बस एक सूत
चिन्ह भाव हर ह्रदय कोण ,प्रतीक दूर बस एक सूत
घनीभूत नित प्रति आकांक्षाएं ,वैराग्य दूर बस एक सूत

(चिन्ह-निष्प्राण होते हैं जो मात्र निर्देश देते हैं प्रतीक-जीवंत होतेहैं जो सत्य का प्रतिनिधित्व करतेहैं शक्ति और सत प्रेरणा देते हैं)